पाँव दबाये आ घुसा घर में सजन बसंत
छू कर मुझको कर गया हाय कतई बदरंग
चुरा ले गया लाली गालों की अधरों से मकरंद
धड़कन धीमी छुई मुई सी बिंदिया से पूनो चंद
हरियाली चोली लाल चुनरिया मेरा बाजूबंद
माला, नथनी, मांगतिलक भी सांसों की भीनी गंध
कुछ भी नहीं बचा है प्रियतम होली में क्या दूं तुमको
आ जाओ घर फाग से पहले फगुआ दे दो मुझको
फगुआ के रंग मांग रही हूँ साथ तुम्हारा संग
अधरों से अधरों पर लिख दो कोई रसवंती अनुबंध.
-unknown
छू कर मुझको कर गया हाय कतई बदरंग
चुरा ले गया लाली गालों की अधरों से मकरंद
धड़कन धीमी छुई मुई सी बिंदिया से पूनो चंद
हरियाली चोली लाल चुनरिया मेरा बाजूबंद
माला, नथनी, मांगतिलक भी सांसों की भीनी गंध
कुछ भी नहीं बचा है प्रियतम होली में क्या दूं तुमको
आ जाओ घर फाग से पहले फगुआ दे दो मुझको
फगुआ के रंग मांग रही हूँ साथ तुम्हारा संग
अधरों से अधरों पर लिख दो कोई रसवंती अनुबंध.
-unknown

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